Tuesday, 17 September 2013

आज ढूंढ ली राह हमने भी खुदके भटकने से पहले |




आज ढूंढ ली राह हमने भी खुदके भटकने से पहले |
उडी खुशबू महफिल में कुछ उनके बहकने से पहले |

हम देखा किये उन्हें उनकी नज़रें इनायत ही ना हुईं |
क्यूँ गिर रही है बिजलियाँ हमपर चमकने से पहले |

निगाह भरकर देखा किये हम जाने किस सुरूर में |
नजरों में भर लिया था उन्हें पलक झपकने से पहले|

सिहरकर रह गये हम भी ख्याल औ ख्वाब में उनके |
सरगोशियाँ सी होने लगी थी उनसे लिपटने से पहले|

मासूम सी कली थी मैं भी फूल बन महकने से पहले |
चमकती थी चांदनी सी मैं सूरज संग दहकने से पहले|

..विजयलक्ष्मी संग अंजना 

2 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (19-09-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 121" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

    कृप्या आप कमेन्ट के वर्ड वेरिफिकेशन को हटा दें पाठको को कमेंट्स करने में कठिनाई होती है,यदि किसी प्रकार का सहयोग चाहिए तो सम्पर्क करें।

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  2. निगाह भरकर देखा किये हम जाने किस सुरूर में |
    नजरों में भर लिया था उन्हें पलक झपकने से पहले...bohat sundar

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