Friday, 7 December 2018

आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है

आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है
मानव की परवशता कविता बन गयी है ||

दुःख भरे विष प्याले पी मधु का स्वाद चखा
जग के अंतर की पीड़ा से मन में राग जगा 
दर्द की लहरों के निरंतर प्रवाह से कविता जग गयी
आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है ||

समय के पत्थर के प्रहार प्रतिपल सहे हैं
बहते झरने दुःख के कब मुख से कहे हैं
है रीत प्रीत की पावन वही सविता लग रही है
आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है ||

विराना सुना था उडती आंधियों का बसर है
जिन्दगी भी सुख दुःख की लहरों का सफर
मधुरिम प्रीत की रीत कैसे मन में चुभ गयी है
आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है ||

प्रतिपल जग ने मेरी निश्छलता को आंका
दर्द के दरिया में तन्हा तिरा न कोई झाँका
क्रांति की इक चिंगारी मन के भीतर लग गयी है
आहत उर की पीड़ा कविता बन गयी है ||
--- विजयलक्ष्मी 

Thursday, 29 November 2018

मेरे शब्द दर्द से वाबस्ता थे ,,

मेरे शब्द दर्द से वाबस्ता थे ,,
लोगो ने शायरी समझी 
दर्द की हर कराहट में उभरी आह ..
लोगो ने अदावत ही समझी 
फितूर दिल का नजरों में आ गया 

उफ़ .. सरलता ने यही जिन्दगी समझी
हर शब्द चाशनी में पगा था
जिन्दगी खूबसूरत समझी
नहीं मालूम था व्यापार दिल का
हमने वही बन्दगी समझी ||

--- विजयलक्ष्मी

Sunday, 24 June 2018

रघुपति राघव राजाराम

पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक शहर है,बहराइच । बहराइच में हिन्दू समाज का सबसे मुख्य पूजा स्थल है गाजी बाबा की मजार। मूर्ख हिंदू लाखों रूपये हर वर्ष इस पीर पर चढाते है।इतिहास जानकर हर व्यक्ति जनता है,कि महमूद गजनवी के उत्तरी भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर चढ़ आया ।
(कुरान के अनुसार दर-उल -इस्लाम = 100% मुस्लिम जनसँख्या )
वह पंजाब ,सिंध, आज के उत्तर प्रदेश को रोंद्ता हुआ बहराइच तक जा पंहुचा। रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम कराया,लाखों हिंदू औरतों के बलात्कार हुए, हजारों मन्दिर तोड़ डाले।
राह में उसे एक भी ऐसा हिन्दू वीर नही मिला जो उसका मान मर्दन कर सके। इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके। परंतु बहराइच के राजा सुहेल देव राजभार ने उसको थामने का बीडा उठाया । वे अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे । महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला । सलार गाजी मारा गया। उसकी भागती सेना के एक एक हत्यारे को काट डाला गया।
हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव राजभार ने अपने धर्म का पालन करते हुए, सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया। कुछ समय पश्चात् तुगलक वंश के आने पर फीरोज तुगलक ने सलारगाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।
आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे, हिंदू औरतों के बलातकारी ,मूर्ती भंजन दानव को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है। सलार गाजी हिन्दुओं का गाजी बाबा हो गया है। हिंदू वीर शिरोमणि सुहेल देव भुला दिए गएँ है और सलार गाजी हिन्दुओं का भगवन बनकर हिन्दू समाज का पूजनीय हो गया है।
अब गाजी की मजार पूजने वाले ,ऐसे हिन्दुओं को मूर्ख न कहे तो क्या कहें ? रघुपति राघव राजा राम' भजन की असली धुन ।
'रघुपति राघव राजा राम' इस प्रसिद्ध भजन का नाम है..”राम धुन” .
जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. गाँधी ने बड़ी चालाकी से इसमें परिवर्तन करते हुए अल्लाह शब्द जोड़ दिया..
आप भी नीचे देख लीजिए..
असली भजन और गाँधी द्वारा बेहद चालाकी से किया गया परिवर्तन..
गाँधी का भजन
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान
** असली राम धुन भजन **
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम
अब सवाल ये उठता है, की, गाँधी को ये अधिकार किसने दिया की,..
हमारे श्री राम को सुमिरन करने के भजन में ही अल्लाह को घुसा दे..
अल्लाह का हमसे क्या संबंध?
क्या अब हिंदू अपने ईष्ट देव का ध्यान भी अपनी मर्ज़ी से नही ले सकता..?
और जिस भी व्यक्ति को हमारी बात से कष्ट हुआ हो..
वो इसी भजन को अल्लाह शब्द वाला संस्करण ज़रा किसी मस्जिद मे चलवा कर दिखा दे.. फिर हमसे कोई गीला शिकवा करे ।

Wednesday, 30 May 2018

जिन्दगी क्यूँकर सवाल है ,,

जिन्दगी क्यूँकर सवाल है ,,
क्यूँ तुम बिन लगे बेहाल है ||


अंखियों में तुम हो सांवरे 
तुम बिन अश्क का उबाल है||


चाँद बिन अँधेरी रात हुई 
हाँ ,ये मौसम ही नागंवार है||


ये तन्हाई लम्बी रातो से
खुशियों का पड़ा अकाल है ||


गुनाहगारी लिख दो नाम
हम यहीं तो हमख्याल है ||


ए जिन्दगी तुम भी खूब हो
क्या मुस्कान इक मलाल है || 


सदके में तेरे सबकुछ दिया
हुई अब जीस्त भी निहाल है ||


जख्म मेरे क्यूँ रख दू गिरवी
दर्द करता रफू भी कमाल है ||


सूरज चंदा अजब साथ बिन 
फूलों का खिलना मुहाल है ||
---------- विजयलक्ष्मी

Wednesday, 23 May 2018

क्यूँ समस्या बनी रहे और आंच जलती रहे ?

क्यूँ समस्या बनी रहे और आंच जलती रहे
राजनीतिक रोटियां अच्छी सिकती रहे ?
इस राजनैतिक रोटियों के जमावड़े में कहो
वतन की जमी टुकडो में क्यूँकर बंटती रहे ||

सिसको ...सिसकना पड़े चाहे जिसको ..
ये धरती किसी स्वार्थी की बपौती नहीं है
देश के लिए करे और स्वावलम्बी बने ,,
खैरात मिले क्यूँकर मंजूर पनौती नहीं है ||

स्वच्छता का भी मजाक बना रखा है
जानबूझकर बिमारियों को गले रखा है
जो देश चलाने की ख्वाहिश पाले हैं
झूठ लोकतंत्र के लिए फैला रखा है ||

टुकड़े टुकड़े गैंग को धिक्कार धिक्कार
देशद्रोह रच रहें जो धिक्कार धिक्कार
सत्ता सुख के लिए जनता से ही धोखा
ऐसे शपथ लेने वालों को धिक्कार धिक्कार ||

दर्द जनता का होता गर घोटाले न करते
न पनपता आतंकवाद शुरुआत पर मरते
होतो ईमानदारी तो हम विश्व में न पिछड़ते
अमीर हुए वही जो मिले गरीबी पर लड़ते ||

माना लड़ने सरहद तक नहीं जा सकते हो ,,
स्वच्छता अभियान से राष्ट्र बचा सकते हो
समाज को बांटने वाले वही तो सत्ता चाहते हैं
मरे कोई यहाँ कौन इंसानियत जिन्दा चाहते हैं ||

मस्जिद की अजान से देशद्रोह क्यूँकर कहो
क्यूँकर पॉप को राजनीती से मतलब कहो
राम लगते सबको काल्पनिक क्यूँ है बताओ
प्रश्न चिह्न क्यूँ पैगम्बर और मसीह पर न हो ||
------ विजयलक्ष्मी