Friday, 20 September 2013

संविधान में देश अपना आजाद है




" लिखा है संविधान में देश अपना आजाद है ,
खा रहे है रक्षक इसे किया मिलकर बर्बाद है.

सुना था दीदार ए जन्नत होती धर्माचरण से 
धर्म के नाम दंगो से हुआ भाई-चारा बर्बाद है.

रंग ए लहू ,लाल है सभी का राम क्या रहीम
दीवारे खींच दी काफिरों ने धर्म ही बदनाम है.

इंसानियत खो रही है, छिप गयी किसी कोने
जमीर मर चुका दिखता हर तरफ श्मशान है.

हुए देह के पुजारी सब ,खोये नेह के पुजारी अब "
छिन्द्रान्वेश दोषारोपण दूसरो पर कैसा बर्ताव है .


 विजयलक्ष्मी

4 comments:

  1. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना आने वाले शनीवार यानी 21 सितंबर 2013 को ब्लौग प्रसारण पर लिंक की जा रही है...आप भी इस प्रसारण में सादर आमंत्रित है... आप इस प्रसारण में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें...इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...

    उजाले उनकी यादों के पर आना... इस ब्लौग पर आप हर रोज 2 रचनाएं पढेंगे... आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।

    आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
    हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
    इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।



    मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]


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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 22/09/2013 को
    क्यों कुर्बान होती है नारी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः21 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra





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