Thursday, 20 March 2014

"ये रोशन चरागात ओ आफ़ताब मुबारक तुमको "



"नींद के आगोश में खिलते ख्वाब मुबारक तुमको ,
उठा हर कदम जानिब ए मंजिल मुबारक तुमको .


दर्द ए बयार तेरी गली से न गुजरे कभी इस तरह 

दर कदम महकती बयार बसंती मुबारक तुमको .


चटकती कलियों का मौसम न बीते बगीचे से तेरे 

शबनमी हर अहसास तुम्हारा , मुबारक तुमको


बरसती मिले खुशियाँ तुझे तेरे आंगन में सदा

महकती मुस्कुराती चांदनी सदा मुबारक तुमको


दीपक जलता रहे तुलसी के तले अरमान भरा 

ये रोशन चरागात ओ आफ़ताब मुबारक तुमको ." 
--विजयलक्ष्मी 

6 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 22/03/2014 को "दर्द की बस्ती":चर्चा मंच:चर्चा अंक:1559 पर.

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  2. बहुत बढ़िया बहुत सुंदर लिखा आपने , आदरणीय कभी हमारे ब्लॉग पे भी पधारे , धन्यवाद
    नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ अतिथि-यज्ञ ~ ) - { Inspiring stories part - 2 }
    बीता प्रकाशन -: होली गीत - { रंगों का महत्व }

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  3. कितना प्यार और अपनापन संगलकामनाओं के आवरण में !

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