Wednesday, 18 July 2012

डर डर के जी रहे हैं ..

अदब भी है पूरा ,और कायदे को जी रहे हैं ,
फरमान मानते है ,हर ईमान को पी रहे है ,
वहशी हुए कुछ जो उनका हिसाब बाकी है ,
आज भी वतन का दरिन्दें क्यूँ खून पी रहे है .
क्या कमजोर हम हुए या वो ताकतवर हों गए हैं,
क्यूँ अपने ही घर मैं हम, डर डर के जी रहे है.--विजयलक्ष्मी

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