Thursday, 6 June 2013

नहीं जाता दिल से ख्वाहिश औ ख्याल उनका .

दामन ए हवा पर नाम लिखना उँगलियों से उनका ,
हमे सुनाता है क्यूँ तराना लेकर के ख्याल उनका .

बडी बेरहम औ बेसबब दुनिया है याद रखना ए दिल ,
सालता होगा यादों में बसना, सामने न आना उनका .

सुना जाती रुबाइयाँ... हवाएं रुखसार को छूकर हमे,
उनकी बात वो जाने हमे भाता है याद आना उनका .

हरसू ख्याल एक ही दर औ दीवार से टकराता क्यूँ है ,
क्यूँ नहीं जाता दिल से ख्वाहिश औ ख्याल उनका .

कितने बेगैरत से हों गए हैं हम ,वो पूछे न पूछे मगर ,
दिल चाहता ही नहीं भूलना और बनना सवाल उनका .
... विजयलक्ष्मी  

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