Friday, 13 June 2014

" हवस की खोपड़ी में छिडककर तेल किस्सा ही........|"

सुना था उत्तरप्रदेश के लोग मरने मारने से नहीं डरते ,
जाने क्यूँ फिर भी इन घटनाओं से उपर क्यूँ नहीं उबरते 

जिसे औरत की इज्जत नहीं जंचती वो जिन्दगी जिन्दा क्यूँ है
जिन्हें शेर कहकर पुकारती थी माँ, शिकार क्यूँ नहीं करते


जितनी बेबाकी बेअदबी भरी गुंडागर्दी भरे कदमों में 
उनको तहजीब की तलवार से कत्ल क्यूँ नहीं करते 


मोमबत्ती जले मगर सडको पर नहीं ,,रूटीन बयाँ जिनका 
उनको मालूम हो लोग सडको पर यूँही नहीं उतरते 


हर तरफ नर्तन है मौत का कुछ और सही कुछ और सही 
हवस की खोपड़ी में छिडककर तेल किस्सा ही खत्म क्यूँ नहीं करते
--  विजयलक्ष्मी 

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