Thursday, 20 February 2014

" दोष नजरों का बेचारा दिल बेमौत मारा जाता है "

"........क्युकि इश्क भी तो इश्वर से किया है ना !!.

.पूर्ण सार है जीवन का ,  और ...

इश्क ने इंसान को खुदा बना दिया ,


औ खुदा को इश्क में इंसा बना दिया 
.- विजयलक्ष्मी 


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उफ़ ये मुहब्बत बड़ी अजीब सी शै है ,
आँख में आंसू देकर मुस्कुराती बहुत है .
जब मुस्कुराते है होठ,.. बाखुदा यारा 
सितम तो देखो आँख को रुलाती बहुत है .- विजयलक्ष्मी



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दिल पे खुद से ज्यादा यकीं हुआ था ,

इसी से खुद को हारकर दिल को जीता दिया .- विजयलक्ष्मी



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दोष नजरों का बेचारा दिल बेमौत मारा जाता है 
होश खोता है दिल और आंसू आँख में समाता है 

लज्जत ए ईमान खामोश लुटता है दीवानगी में 
बेहोश मंजर यूँ विरानगी नजर में आँख रुलाता है ..- विजयलक्ष्मी


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