Sunday, 23 February 2014

..कोई लिखे या न लिखे इतिहास में

हमारी स्वतन्त्रता के बाद पैदा हुए देश ..विकास के मामले में हमसे आगे क्यूँ ?
...जिस दल ने अधिक गद्दी सम्भाली उसके नेता उतने ही ज्यादा अमीर क्यूँ हैं?
...चुनावी टिकट का आधार है क्या...चुनावी जंग का खुलासा होता नहीं क्यूँ ?
.सेवा ही करनी है मंत्री पद का लालच क्यूँ ?
..अच्छा पद बुरा पद का रोना होता है क्यूँ ?
..राष्ट्रिय सेवा में नेता इमानदारी के स्वयम्भू प्रायोजक है क्यूँ ?...
ऐसे बहुत सारे क्यूँ से भरा हुआ है आज के वोटर का जेहन ..दलों को नागरिक की जरूरत नहीं क्यूँ ..वोटर भाता है क्यूँ ?...लचर शिक्षा ,,मानक गायब ,,भाई भतीजावाद ,,बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया ...
यही सत्य रह गया सबके पास ..जेब में पैसा है तो लोग वैश्या को भी सलाम ठोक दे
भूखी गरीब माँ भी नहीं भाती.."..परसु परसा ..परसराम " वाली बात चरितार्थ होती है ",,ईमान ..जमीर.. सत्य सब दिखावे के लिए रह गये हैं अरे भाई आप लोगो को पैसा खाना है खाओ ..मगर कुछ तो उस देश को उसके नागरिको की भी हिस्सेदारी बनती ही होगी ......टैक्स हम भरे तनख्वाह विधायको की बढती है ..बिना किसी विरोध के ...ये विरोध उस दिन कही खो जाता है या कुम्भकर्णी नींद सो जाता है ....वोट से पहले सोचना होगा ...भावनाओं में बहकर नहीं वोट सम्भलकर देना होना ......अन्यथा
देश को गर्त में पहुंचाने में हमारा और आपका नाम भी दर्ज होगा ..कोई लिखे या न लिखे इतिहास में .--- एक नागरिक (विजयलक्ष्मी )

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