Tuesday, 18 February 2014

" कॉपीराइट "

" कॉपीराइट "


चोरी करो या भीख मांगो ..बस अपने भगवान के दर से 
इंसान से क्यूँ मागना वो तो खुद भिखारी है उसी दर का .
........इन्सान से लेने पर उपर वाले का कॉपीराइट एक्ट लागू होना चाहिए 
जो संगीन जुर्म है .... 
इसीलिए उसने जितने इंसान बनाये सबके फिंगर-प्रिंट अलग है 
किस्मत अलग रंग-ढंग अलग 
फिर रोने पर कंधा लेना देना भी कॉपीराइट ही है 
क्यूंकि सहारा देना भी उसी का अधिकार क्षेत्र है 
कॉपीराइट में विचार भी है ...आचार भी है
फिर सब एक व्याकरण का प्रयोग क्यूँ करते है
उसी अन्न को एक जैसे तरीके से क्यूँ बोते है
खाद पानी का एक ही फार्मूला क्यूँ प्रयोग होता है
खाना बनाने का एक तरीका क्यूँ है सभी आग क्यूँ जलाते है
प्रकृति को चित्रित क्यूँ करते है
प्रेम या नफरत ...क्या इसपर किसी का कॉपीराइट नहीं है ?
प्रश्न और उनके उत्तर ...लग रहा है न नया नया सा अलग अलग सा ..
हाँ लगना ही चाहिए ...क्यूंकि इसपर कोई कॉपीराइट अभी लागू नहीं हुआ
गुलाब के इतने रंग क्यूँ हैं ...
फूल अलग आकार-प्रकार के होकर एक जैसे रंग के क्यूँ है
हर पत्ती का रंग हरा क्यूँ ..
सब इंसान दो हाथ पैर के पशु चार पैर वाले क्यूँ हैं
कॉपीराइट में घोड़ो के पैर में लोहे की नाल लगाता है इंसान
बैल और झोठे ऊँट को नाथ लगाता है ...ये कॉपीराइट उन्ही के नाम पर है
औरत को नाक में नकेल ...हाथ में चूड़ियों का कॉपीराइट ...
कुछ गलत कहा क्या ...किसी पुरुष को देखा सिंदूर लगाते हुए
सुहाग चिन्ह अपनाते हुए ...जातिगत कॉपीराइट है
सभी आसमान नीले रंग का क्यूँ दर्शाते है
पानी चित्र में आकाश के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करता है उसका रंग लेकर
ओ आसमान तू चुप क्यूँ है ठोक दे मुकदमा उसपर ..और उस इंसान पर जो बनाते है बार तुम्हे रंगों से उतारते है जमी पर ...
चाँद औ सूरज को मुकदमा ठोक देना चाहिए इंसान पर ..
जब चाहे किसी को चाँद सा चेहरा ...और सूरज सा रोशन करार दे देते हैं ..
आशीर्वाद पर तो कॉपीराइट एक्ट बनता भी है ...
नागफनी पर मेरा अधिकार हुआ
कांटें तो स्वत: ही हमारे हुए ...किसी को चुभे तो दर्द पर भी हमारा अधिकार हुआ
फूल सबको भाये
क्यूँ न ऋतुओ से बदलते मिजाज का कॉपीराइट तय हो जाये
क्या पावस ऋतु के पास अधिकार है इन्द्रधनुष के कॉपीराइटका
नहीं न इन्द्रधनुष आकाश में दिखता सतरंगी रंग लिए
प्रेम का कॉपीराइट किसे दिया जाये ..माँ को या पिता को
बहन को या भाई को ..प्रेयसी पत्नी नन्द भौजाई ...रिश्तों की जग हसाई
प्रेम या नफरत ...क्या इसपर किसी का कॉपीराइट नहीं है
है न प्रेम का सिर्फ कृष्ण को ..
नफरत कंस को या शकुनी को ..चलो दोनों की हिस्सेदारी हुयी
पर रावण हिरण्याक्ष होलिका मन्थरा को कैसे छोड़ दिया जाये
राधा को क्यूँ छोड़ गये कृष्ण ..शायद ...कोई और कानून लागू होता होगा
मजाक के रिश्ते का कॉपीराइट जीजा-साली के नाम ..
किस रिश्ते के नाम पर सुप्रभात ...रामराम ,,नमस्ते नमस्कार प्रणाम लिखना होगा
नेताओ के नाम पर झूठ ...सच पर मुलम्मा चढ़ाना ..देश को बेचकर खाना खादी के कपड़े
शिक्षा पर ब्राह्मण का अधिपत्य है ..चाहे सबसे ज्यादा अनपढ़ ही क्यूँ न हो कॉपीराइट है न
फिर इंजीनियर और डॉक्टरों पेशे पर निर्धारित होना चाहिए न कॉपीराइट..
इम्तेहान के पर्चे के जवाब पर लागू है ...पर परेशानी किताब एक ही है न
चलो भगवान ने अक्ल के घोड़ो की दौड़ अलग बनाई है..
बहुत मुश्किल में हूँ ...कशमकश खत्म नहीं होता ..
विचार रुक नहीं रहे वक्त भागा जा रहा है ...वर्ण वही है गिनती के
हर खेत में मिटटी है ...पानी खाद ...फिर वही रोजी रोटी का लफडा ...
भूख का कॉपीराइट किसके पास है ..और.. मेरी रूह की प्यास का हिसाब किस एक्ट में है
हंसी तो खो गयी ....उस पर असवैधानिक होने का आरोप सिद्ध हो चुका है
जो संवैधानिक नहीं मतलब नाजायज ...समाज से परित्यक्त ..तड़ीपार ..
बहुत गलत बोलती हो.. जाओ ,पेटेंट कराओ पहले अपनी हर चीज को
आचार-विचार ,प्रेम -नफरत ,लोक दिखावा ,लोक व्यवहार जिन्दगी और मौत का भी
पेटेंट ..बस बाकी कुछ नहीं सबकुछ हासिल ..
लो हो गया ...तुम्हारा भी पेटेंट ?
क्यूंकि पत्थरों पर लकीरे खींचने की आदत जो ठहरी
मनुष्य सामाजिक प्राणी है ...और हंसना मुस्कुराना अवैधानिक इसलिए जो प्रयोग करता पाया गया .....उसपर कानूनी प्रक्रिया लागू होगी ...(क्रमश:)--- विजयलक्ष्मी



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