Saturday, 26 April 2014

" आओ,उसे बेदखल करे "

बेच रहा है जो देश को ,
आओ,उसे बेदखल करे

सत्य की राह पर चल ,
बता क्यूँ पैदा खलल करे

लो परीक्षा की घड़ी आई है ,
न हो ,अब कोई नकल करे

तोड़ दो ख़ामोशी चीख से ,
मुस्कुराहट न विकल करे

शब्द शब्द लिख ह्रदय से ,
मिल कलम को सफल करे

तस्वीर अहसास से बना ,
जो रंग भरे सब असल भरे.- विजयलक्ष्मी

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