Tuesday, 9 October 2012

तो क्या होता ...



चलो हमने किया माफ़ मगर अपने दिल से पूछो,
गुस्ताखियाँ यही गर हमने की होती तो क्या होता.

सोचो मुहब्बत है कितनी हम खुद को भूल गए ,
इस हाल हम गर तुमको भूले होते तो क्या होता .

खुद  को याद रखने का वक्त न रहा क्या बताए,
अजब सा वक्त है तुम भी होते संग, तो क्या होता.

दर्द ए दिल औ दर्द ए दुआ भी दिखने लगा असर,
यादें है तुम हों हम है कोई न होता तो क्या होता ,

सफर तन्हा कैसे कहे अब  तन्हा भी नहीं हम,
हाल ए दिल हमारा, तुम्हारा हुआ होता तो क्या होता.-- विजयलक्ष्मी  

No comments:

Post a comment