Thursday, 11 October 2012

जहर मीठा देकर जिंदगी ...

खेलते रहे हर डगर वो ,हर रंग से हमे लुभाते रहे 
हम नादाँ न समझे हकीकत,गमों में भी मुस्कुराते रहे .
खेल बना कर रख दिया मेरे हर एक जज्बात का ,
देकर खिलौना इन्तजार वक्त बस आजमाते ही रहे .
न सोचा क्या होगा हकीकत का रंग खुलेगा ,
जहर मीठा देकर जिंदगी हमारी,हमसे ही चुराते रहे.
आज कहकर हर सरोकार ए हादसा चले गए ,
आजमाइश ए रंग हों गर बाकी बता ,हम भी आजमाते रहें . - विजयलक्ष्मी

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