खुद से ही जुदा हूँ इस कदर ,
बता, किसी का भी अहसास कैसे रहे .
ए जिंदगी न खफा हों इसतरह ,

"बहुत बेरहम ये दुनिया है गम देके दामन में ,हंसती है,
कहूँ किसको गर नाखुदा ही मेरे जख्मों से रश्क कर बैठे ." - विजयलक्ष्मी

"आ लबों पर तेरे भी तबस्सुम सजा देते है ,
बैठ कुछ देर,थोडा सा ही सही मुस्कुरा लेते है ."- विजयलक्ष्मी

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