Friday, 10 August 2012

ए जिंदगी ...




खुद से ही जुदा हूँ इस कदर ,
बता, किसी का भी अहसास कैसे रहे .
ए जिंदगी न खफा हों इसतरह ,
तेरे बिन बता जिंदगी का साथ कैसे रहे.- विजयलक्ष्मी

 


"बहुत बेरहम ये दुनिया है गम देके दामन में ,हंसती है,
कहूँ किसको गर नाखुदा ही मेरे जख्मों से रश्क कर बैठे
." - विजयलक्ष्मी 
 

"आ लबों पर तेरे भी तबस्सुम सजा देते है ,
बैठ कुछ देर,थोडा सा ही सही मुस्कुरा लेते है ."- विजयलक्ष्मी

No comments:

Post a comment