Monday, 28 July 2014

" किस लिए सत्य ..कहाँ है सत्य ,,"



कीमत सत्य की ..
क्या धन ,..या जीवन 
सुना है कुछ लोग चरित्र से गिर जाते हैं 
देह के रिश्तों से भी गुजर जाते हैं 
वासना का नग्न नृत्य क्या चारित्रिक हनन 
सत्य के लिए ,
क्यूँ जान मांगते है लोग 
क्यूंकि डरते हैं सत्य से 
सत्य ..बोल पर्दा खोल 
" सत्यम शिवम सुन्दरम "
क्या सम्भव है सत्य बोलना सत्य तो मर चुका है
तुम नहीं जानते ,,
जब देश की आजादी के लिए छल किया गया था हिन्दुस्तानियों के साथ
चंद दलालों ने कीमत पायी थी कुछ खबरों की
सत्य की कीमत तुम ...नहीं तुम किसी सत्य की कीमत नहीं हो
झूठ के सौ चाहने वाले सत्य के पुजारियों के लिए झटका नहीं धोखा
किस लिए सत्य ..कहाँ है सत्य ,,
सत्य चीख रहा है कब्र में ,जीवन के सब्र में
सत्य को कफन दिया जा चुका है
कफन के बाद कीमत नहीं दी जाती
झूठ को उसका हक मिल चुका ...कब तक नौचेगा हमे
अब तो निखरने दी सत्य को ,
झूठ की अखरने को देख सत्य को
हर तरफ खुशबू सा बिखरने दो सत्य को
अस्तित्व संवरने दो सत्य का
कलम को गुनगुनाने दो सुर सत्य का
एक उंची तान उठाने दो सत्य को
झूठ की बलि चढा ..परचम लहराने दो सत्य को
कीमत नहीं जश्न मनाने दो सत्य को
हर चेहरे का आइना बन जाने दो सत्य को
हर चेहरे पर मुस्कुराने दो सत्य को
मन की मलिनता मिटाने दो सत्य को
हर दिल पर सियासत जमाने दो सत्य को
तुम सत्य हो न ....मुझे भी अपनाने दो सत्य को
भाग्यरेख बन जाने दो सत्य को
जिह्वा पर आसन जमाने दो सत्य को
न्याय का साथ निभाने दो सत्य को
ईमान संग निखर जाने दो सत्य को ..
ठहरो ,,,मेरा हो जाने दो सत्य को --- विजयलक्ष्मी


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