Thursday, 31 July 2014

कभी जीवन तो कभी प्रलय के नाम में बरसा..





भीगा भीगा सा बादल
इंतजार में बरसा
एतबार में बरसा
नफरत से शुरू हो प्यार में बरसा
दर्द में बरसा मौसम सर्द में बरसा
हद अनहद के साथ में बरसा 
दिल पर घात में बरसा
ख़ुशी की बात में बरसा
कभी विदाई कभी बारात में बरसा
दिन औ रात में
कभी तन्हा तो कभी साथ में बरसा
मुहब्बत ए रुसवाई में बरसा
दिल की शानसाई में बरसा
नजर के साथ में बरसा
मिलन के साथ में बरसा
जुदा हो एकांत में बरसा
जीवन बसंत में बरसा
कभी शुरुआत में बरसा .. कभी अंत में बरसा
कभी अहसास में बरसा
दिल उदास में बरसा
बेरुखी औ तब में बरसा
लिपट अहबाब से बरसा
कभी तूफ़ान संग बरसा
कभी बर्बाद करता सब बदरंग बरसा
कभी सूखे खेत में बरसा
कभी खलिहान में बरसा
कभी घर में तो कभी मकान में बरसा
कभी जीवन तो कभी प्रलय के नाम में बरसा
कभी सुखा सा आषाढ़ तो सावन बाढ़ बन बरसा---- विजयलक्ष्मी

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