Wednesday, 26 December 2012

सच में सुधार जरूरी है ...?

सुधार जरूरी है शुरुआत हों संस्कारों से ,
गृहधर्म निर्वाह ,कर्म और विचारों से .
हिस्सा हम भी है तुम भी इसी समाज का ,
शुरू करना सुधार है अपने ही परिवारों से.
क्यूँ चूक गए हम और चूक कहाँ हुयी हमसे ,
देखना होगा हमे खुद के व्यवहारों से .
गलती करें और गिर के सीखे जरूरी नहीं है ,
दूसरे को गिरते देख सबक ले किरदारों से .
खरीद फरोख्त का बाजार है खुला हे नुक्कड़ पे ,
क्या गलत सही सीखना होगा गुनहगारों से .
जानकर दलीलें क्या वक्त बदल जायेगा ...
इंसानियत का रंग भर,सीख लेना समाज के ठेकेदारों से ...!!
.- विजयलक्ष्मी

No comments:

Post a comment