Sunday, 2 December 2012

नूर नैनों का चेहरे पर बिखर जाये ..

डरते ही रहे होंगे झूठे वादे भी 
न टूट जाये इंतजार ए रोशन शब में ,
न डूब जाये जिंदगी ...इंकार ए गम में ,
वादे भी करें वो भी झूठे ...
हाँ उम्मीद की किरण दीप सी गर जल जाये ..
झूठा किया वादा भी मुकम्मल हों जाये ,
चाँदनी रात तन्हा होकर भी संवर जाये ..
नूर नैनों का चेहरे पर बिखर जाये ..
तो झूठे वादे भी कर जाये .- विजयलक्ष्मी

No comments:

Post a comment