Tuesday, 12 March 2013

आंचल सितारों का भेजा उसने ..

क्या कहते जख्म कुरेदा उसने ..
मरहम भी हर बार भेजा उसने .

रिसने लगा खुद में लहू सा जब ..
मैं जाता है यही खत भेजा उसने.

गम का आसमां लिए है सर पे ..
आंचल सितारों का भेजा उसने .

पैबंद हुए थे हम जहाँ टाट के से ..

पर्दा हर बार रेशम का भेजा उसने .

रंग ए जुनूं सा है बाकी कुछ नहीं ,
तू खुदा है ,पैगाम यही भेजा उसने

मरता ही गैरतमन्द है सदा से ..
हाथों में फिर खंजर सहेजा उसने .

जख्म कितने , मुश्किल गिनना..
पयाम मुस्कुराहट ही भेजा उसने
.-- विजयलक्ष्मी 

No comments:

Post a comment