Tuesday, 12 March 2013

खून-खराबा करो कौन सा मजहब कहता है ..





















"छोड़ कर धर्म की बात जब देश के हों जाओगे ,
तभी सपूत देश के सच्चे कहलाओगे ,
धर्म को अपने आंगन के बाहर गर दिया झाँकने ,
लगता है वो तुरंत दूजे को आंकने ..
यही तो झगड़ा है कौन सबसे बड़ा 
चल हट,,, मेरा धर्म तुझसे बड़ा ..
खोट निकालो मन से तेरे मेरे की ..
कह एक बार स्वच्छ मन से जरा ..
तेरा धर्म नहीं छोटा मेरे धर्म से जरा ..
इन नेताओं के कहने में आकर ..
बैठे हैं भाई भाई भी देखो तो लड़कर ..
धरती कब कहती तू हिंदू ज्यादा दानी है ..
या ईसाई काम गुनहगार या कम पानी है ,,
हुसैन गए माना धर्म को खूब चलाया
पर उसने भी कर्बला में पत्थर दुष्टों को लगवाया ..
खून-खराबा करो कौन सा मजहब कहता है ,
इंसानी करतब में असली मजहब रहता है
फिर भी होता रोज धर्म का झगड़ा है ..
जबकि इंसानियत का धर्म ही इन धर्मों में सबसे तगड़ा है "
..-- विजयलक्ष्मी 

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