Monday, 4 March 2013

क्या कहिये ..

नजरें उठाकर हमको देख पाना उनका .....क्या कहिये ,
एक अलग ही अंदाज में नजरें मिलाके झुकना उनका ,क्या कहिये .

कहने भर को दूर बैठे हैं आज भी वो हमसे ,
बिन बोले ही मेरे सामने से यूँही गुजर जाना उनका ,क्या कहिये .

जमाने की नजर से देखें तो नामाकूल हम है ,
देख कर जमीं पर सामने मेरे ही मुस्कुराना उनका, क्या कहिये .

यूँ तो तस्वीर है सादगी की कयामत की तरह ,
चुनरी संग बलखाती हुयी लता सा लहराना उनका ,क्या कहिये .

उनको देखते ही कयामत का गुमाँ होता है ,
बेपरवाह सी शिद्दत ए नजर से मुझे बाँध जाना उनका क्या कहिये .

देखने से ही अहसास हमसफर बन गए आँखों के ,
ख्वाब हुए अहसासों संग मुझमे लहू सा बहना उनका ,क्या कहिये
.--विजयलक्ष्मी

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