Saturday, 19 December 2015

" ये न्याय वाले कहाँ सो गये || "

" तुम जब से खुदा हो गये ,,
जिन्दगी से जुदा हो गये..||


छूटती नहीं आदत हमारी,,
बेमुरव्वत सी सदा हो गये..||


झांकना दिल के आईने में,,
बड़ी खूबसूरत सजा हो गये..||

न दीपक न अजान ओ नमाज
कलम ए इबादत अता हो गये..||

मौसम पतझड़ होगा नहीं,,
राह ए वफा में फना हो गये..||

दीन ओ इमां मुहब्बत हुआ,,
लम्हे वफा की अना हो गये ..||

सियासत ए रियासत .न पूछ,,
घोटाला ए किस्सात जमा हो गये..||

रूहें खुदाई ... देह पंचभूती,,
वेदांत क्यूँकर खफा हो गये..||

गिद्ध लिए देखे सिद्ध दृष्टि,,
सिद्दांत सारे हवा हो गये ..||

हाँ ,,ये मानस ... वो मिडिया
उजड़ते सच के निशाँ हो गये ..||

मत छोड़ना पकड़े लुटेरे ,,
ये न्याय वाले कहाँ सो गये || "-
--- विजयलक्ष्मी

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