Friday, 11 December 2015

" वो झूठ के ही मददगार है "

" सच बांदी बनाई झूठ की ,,
ईमानदार भी गुनहगार है .
सच को तवायफ बना दिया
सब तलबगार ही गुनहगार है
झूठ से निकाह सच को तलाक
वैमनस्य के भी रिश्तेदार हैं .
गिनो गुनाह ईमान से ही
यहाँ बेवफा ही तलबगार है
मुर्दादिल लोगो से बचे कैसे
वो झूठ के ही मददगार है "
 ----- विजयलक्ष्मी

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