Friday, 7 November 2014

" इल्जाम भी उन्ही का है.. हम काफ़िर हो गये "

मेरा देवता पत्थर का ...इल्जाम सारे मुझपर .
मैं पत्थरदिल पत्थर से इल्तजा भी क्या करूं ----- विजय




छायाचित्र छोड जिसने मुडकर भी न देखा कई प्रहर 
शिकवा शिकायत उन्ही का ,,,हम मिलने नहीं आते ---- विजय




" सजदा ए तहरीर जिसकी बैठा किये पल पल ,
इल्जाम भी उन्ही का है.. हम काफ़िर हो गये " --- विजय




वो हंसते भी आँखों में है रोते भी आँखों में ,
रहने लगा है जिक्र उनका हर पल बातो में --- विजय 






  • मेरी नींद ले गया है वो , अपना ख्याल छोडकर ,
    जीता हूँ न मरता हूँ इक उनका ख्याल छोडकर -- विजय





  • दिल का रोग है ,,क्यूँ  इलाज आखो का ,
    रातो को नींद गायब ख्याल ख्वाबो का -- विजय 


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