Monday, 3 November 2014

क्या लिखूँ ..?

" जज्ब ए मुहब्बत लिखूं भी तो क्या लिखूं ,
वतन पे कुरबां जाँ लिखूं या इम्तेहा लिखूं ||

सरहद पे बंदूक की गोली लिखूं तोप लिखूं
मरे जमीर की ख्वाहिश बुखारी क्या लिखूं ||

फकीरों की जागीरी सुनी थी रहमत ए खुदा
गद्दार तबियत के हाजी  इमाम क्या लिखूं||

हामिद औ अशफाक से वतन परस्ती पूछ
देशभक्तों में गद्दार, द्रोही इमाम क्या लिखूं ||

सर काटने वालो के तलुए चाटता क्यूँ ईमाम
मजहब के नाम पे बदनुमा दाग क्या लिखूं  |
| " ------ विजयलक्ष्मी 


No comments:

Post a comment