Friday, 4 September 2015

" जय शिक्षक दिवस "

" शिक्षक दिवस ,या विडम्बना दिवस क्या नाम दूं इसदिन को...ये विडम्बना नहींतो और क्या है सरकारे अपनी अपनी हांकती रहती है..लेकिन नतो वर्तमान सुरक्षित हुआ और न भविष्य के अभी आसार है...आजादी से गये सालो तक मात्र दौलत बनाने में वक्त लगाया गया लेकिन राष्ट्र निर्माण में नहीं ...कितने घोटाले किये गये ..यदि किसी एक घोटाले की अपेक्षा कुछ समय शिक्षा अभियान में दिया जाता तो शायद......सम्भव था..किन्तु शिक्षा को तो भिक्षा में भी देने को तैयार नहीं है विद्यालय की और भी सुदर तस्वीर देखने को मिलती है जब सरकार द्वारा भर्ती किये गये रिश्वत के टट्टू को देश की राजधानी का नाम भी याद करना पड़ता है ...जिन्हें खुद को ठीक से पढना भी नहींआता वही बैठा दिए है पढाने के लिए...अँधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को देय...... शिक्षक की स्थिति दिहाड़ी मजदूर से भी बदतर है...उसके पास इतने काम है जिन्हें करते हुए जिन्दगी बीत जाती है शिक्षण जिस मुख्य कार्य के लिए नियुक्ति हुई बस वही लिस्ट में कभीशामिल नहीं होता...क्यूंकि सरकारी विद्यालय में अधिकारी नहीं नरेगा के मजदूर तैयार किये जाते रहे हैं बकाया कोई चिंता भीक्यूँ करें उनके बच्चे तो अंग्रेजी पब्लिक स्कूल में पढ़ते है भई....जीवन प्रेरक न ज्ञान मिलताहै न आदतें शिक्षक दिवस की शत प्रतिशत बधाई आपको भी..
काँटों से होकर सही रास्ते तो निकाल ,
शिक्षाण संस्थान बने भिक्षण संस्थान.
न कायदा कोई न लगता फायदा कोई
कभी पशु गणना ,कभी मिड डे मील
रोटी बनाकर खिलानी..फिर सरकारी जमात जिमानी
अजी बस छोडिये टंटा ...पढाई को न इक घंटा
पढ़ाएंगे क्या ख़ाक,भविष्य नौनिहालों का कर रहे हैं राख
इसी राख को उठाओ ..
शिक्षा की भिक्षा नहीं तो उन्ही के मस्तक चढाओ
जय राज्य सरकारें,, जय शिक्षक दिवस ||
"--------- विजयलक्ष्मी

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