Monday, 14 September 2015

" मुझे गर्व है खुद के हिंदी भाषी होने पर .."



" जनसाधारण में हिंदी का महत्त्व बढ़ा है या ये फेसबुक की जरूरत...खैर जो भी हो सामाजिक साईट पर हिंदी उन्नत्ति के सोपान लगातार चढ़ रही है...... बहुत से रोमन वाले हिंदी में आगये...... इसके लिए गूगल हिंदी का विशेष योगदान है...उसका भी शुक्रिया... दुःख देता है अपने ही घर में गैरों सा व्यवहार वो दिन सबसे सुनहरा होगा जिस दिन हिंदी बोलने में शर्म नहीं गर्व महसूस होगा जनसाधारण को ...जय हिंदी .... जय हिन्दुस्तान |
हिंदी जिन्दा हो सिर्फ एक दिन के लिए ...क्यूँ
याद करें मातृभाषा को सिर
्फ एक दिन के लिए... क्यूँ
तिलांजली देदो इसे जीवन की अधिकारिणी ...क्यूँ
मोहताज दूसरो की जो उसे जिन्दगी ....क्यूँ
आप यही करते है रहते हिन्दुस्तान में है ,
खाते हिन्दुस्तान का है गाते अंग्रेजी है ....
ये किसने कहा अंग्रेजी मत पढो या न पढाओ ..
भाषा ज्ञान जितना हो उतना कम ..
किन्तु तज देते हो हिंदी को पूरा बस इतना ही है गम ..
जीवन दो पूर्ण जीवन दो ..
निज भाषा की उन्नति के तो स्वयम की उन्नति भी सम्भव नहीं है ..
जिस भाषा में दिमाग में सोचते हो उसे जिन्दा रखो जबान पर भी ..
शर्म ओ हया के साथ नहीं ..पूर्ण स्वाभिमान से ..
हाँ ...हम हिंदी भाषी है ..हिंदी ही मेरी मातृभाषा है .
मुझे गर्व है खुद के हिंदी भाषी होने पर ..
हिंदी बोलो.. हिंदी जियो ..हिंदी लिखो
."
---- विजयलक्ष्मी


" हिंदी को अपमानित कौन कर रहा है 
हिंदी का शोषण कर अपना पोषण कौन कर रहा है 
हिंदी को किसी की नौकरानी कौन बना रहा है 
हिंदी को नीचा कौन दिखा रहा हैं 
हिंदी के साथ रहने में कौन लज्जित महसूस कर रहा है 

हिन्दी की जिन्दगी को कम करके उसे एक दिन का मुहताज किसने किया
कौन है जो दे रहा है जहर हिंदी को नित्य प्रति
कौन है जो कर रहा है उसे बिन चिता में बैठाये सती
कौन है जिसने बंधक बना डाला उसे उसे उसके ही घर में
कौन है जो देखना तो चाहता है खूबसूरत मगर देता नहीं संवरने
कौन है इन सबका जिम्मेदार ...सजा उसे दीजिये ..
कौन है जिसे हिंदी के साथ पिछड़ने का डर है
कौन है जो बतायेगा कौन सा उसका असली घर है
मैंने सुना है हिंदी बरसों से चैन से सोई नहीं है
ध्यान दे ...क्या आप तो उनमे से कोई नहीं है ?
" .---- विजयलक्ष्मी




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