Tuesday, 6 November 2012

गमले के पौधे मोहताज होते है माली के ..

गमले के पौधे मरते है मगर लापरवाही से माली की ,
बुराई उनमे नहीं होती उन्हें मिलती है सिमित जमीं ,
मगर खिलते भी वही तरतीब से है सलीके के साथ ,
बिन तरीके चलने वालों को लोग आवारा कहा करते हैं .
जंगली जानवर बहुत शातिर होते है जीवन के खेल में,

शातिरी सीख लेते है मगर जंगलीपन साथ चलता है ,

कुछ पौधे मर जाते है जिंदगी की शुरुआत में और ...
सच है जिंदगी इतनी आसान भी नहीं हों तुम ...
हर दिन बसंत सा होता है और हर पल मौत का खतरा ..
खुशी भी जहाँ है और गम भी लम्हों के साथ चलता ..
तितलियाँ निहारती है पल भर को ही सही चली आती है खुशियाँ बांटने
यही बहुत है गमले के पौधे को खुशी में नम कर लेने को आँखें ..
और जी लेने को अहसास जिंदगी तुम साथ हों मेरे ..
हम बोनसाई ही सही मगर खिल लेते है कुछ देर ही सही ..
चाहो तो जिन्दा रहेंगे हमेशा ...जब चाहो मार दो ..
गमले के पौधे मोहताज होते है माली के ..-- विजयलक्ष्मी

No comments:

Post a comment