Saturday, 11 July 2015

" किस पुरुष पर नाज करे नारी ..जिसने वन भेज दिया या जिसने चौपड़ में बेच दिया "

" एक लम्पट एक सम्पट जनता करे गुहार 
एक राजा एक खाजा बाकि सब आचार 
चपेट चपेट रोटी खाई भूख क्यूँ है बीमार 
अजी मरने वाला भूखा कैसे मरा ,,
राजा का चलता भंडारा...पर थाली का खेल निराला था राजा ही बांटने वाला था 
बोले चंदा का झिंगोला सिलवाओ क्यूँ होता है आधा अँधा हड़ताल पर बैठ जाओ
मंत्री में आदेश दिया समन्दर किनारे बाढ़ लगाओ ,,
ज्वार भाटा में उठते पानी का वजन करवाओ
गिरते समन्दर के मरहम लगवाओ ..खर्चे की वसूली जनता की जेब से खा खाकर मुटिया गयी है
हनुमान लंका गया था अपना पैर क्यूँ न धरा था ...अंगद से कितना कमिशन तय करा था
युधिष्ठिर ने झूठ बोला सबको पता है दुर्योधन झूठ का बना था भीष्म को कहना मना था
कृष्ण की चातुरी महाभारत न रोक सकी ,,
अभिमन्युं की मृत्यु पर काल को टोक सकी ,वहीँ उत्तरा का गर्भ ठहरा गया ,,,
अश्व्थामा का अस्त्र्र लीलकर भी ठहर गया ..
हाँ रावण आतातायी था ,,उठाकर लाया नार पराई था ,,
लेकिन मर्यादावादी था श्राप से सहमा था या मौत का उत्तरदायी था
जिसने शिव से अमृत को पाया था ..सच कहना क्यूँ सीता को लाया था ,
सीता क्या सचमुच चंडी थी ,क्यूँ अर्जुन की कवच रूप शिखंडी सी ..
योद्धा युद्ध को हार रहा ...किन्नर के पीछे से मार रहा ,
क्यूँ बाली को धोखे से मारा ,,क्यूँ विभीषण दाग बना लंका का पाया राज मगर लंका का
किसने मारा किसने तारा सीता फिर भी वनवासिन थी ,
जनता की बातों ने डसा उसे ,,
किस पुरुष पर नाज करे नारी ..जिसने वन भेज दिया या जिसने चौपड़ में बेच दिया
हुआ करे योद्धा अर्जुन ,,और युधिष्ठिर सत्य का रहे पुजारी ,
सतयुग तारा को बेच गया ,,
सीता त्रेता की मारी थी
द्वापर में द्रोपदी चीरहरण
कलियुग अलग हुआ कैसे अब हठात बलात्कार की मारी है
अंतर्मन में झाँक पुरुष ...औरत को कम मत आँक पुरुष
माना आया तेरा राज पुरुष ,,औरत बिन नहीं साज पुरुष
" ---- विजयलक्ष्मी

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