Monday, 27 July 2015

कलाम को सलाम || जयहिंद || ... जय भारती का लाल ||


कलाम को सलाम || जयहिंद ||
...
जय भारती का लाल ,
ऊँचा किया माँ का भाल 
मिसाइल मैंन या इस्माइल मैन ....
तुम्हे कभी मुरझाते नहीं देखा ,,
हर लम्हे से सीखते मुस्कुराते ही देखा
खौफनाक मुश्किलें कदम बढ़ाते ही देखा
गरीबी की निम्नतम रेखा से उठ आसमा छूते देखा
कलमे आयतों की जुबां से आगे वतन पर मिटते देखा
मजहबों को तुम्हारे नाम पर सिमटते देखा
आसमा के उस छोर उगते ख्वाबों को संवरते देखा
इन्सान में इंसानियत को उभरते देखा
शिद्दत से बदलती किस्मत को देखा
मिसाइल मैन या इस्माइल मैन..
तुझे कभी मुरझाते नहीं देखा
तुम फूल हो वतन बगीचे का
जिसे पतझड़ में भी खिलखिलाते देखा
जय भारती का लाल ,
ऊँचा किया माँ का भाल
कलाम को सलाम || जयहिंद ||
---- विजयलक्ष्मी


विलक्षण व्यक्तित्व हमेशा के लिए अलविदा कह गया. भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर
वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे. शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा. आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष के कलाम साथ छोड़ चुके थे
.
एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. एक मछुआरे का बेटा अखबार बेचा करता था. यह कलाम के जीवन का शुरुआती सफर था. वे देश के चोटी के वैज्ञानिक बने और फिर सबसे बड़े राष्ट्रपति
पद को भी शोभायमान किया. वे करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे. अपनी वाक कला से हजारों की भीड़ को मंत्र-मुग्ध करते रहे. युवाओं में नया करने का जोश और हौसला भरते रहे. दो दर्जन किताबों में अपने अनुभव का निचोड़ पेश किया. लेकिन अंत तक ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक 'लर्नर' बताते रहे.


ट्विटर पर उनका परिचय इस तरह है,
'साइंटिस्ट, टीचर, लर्नर, राइटर. भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में सेवाएं दीं. 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिये काम कर रहा हूं.'
जानिए कलाम के बारे में 10 खास बातें:


1. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ.
2. पेशे से नाविक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे. ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे 

३. शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा.
4. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहा कर जाने के पीछे कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए
आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे. 

5. कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं.
वो कहते हैं, ‘वो हमारे अच्छे टीचर्स में से थे. एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दिया तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए. वहां कई पक्षी उड़ रहे थे. कुछ समुद्र किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे. वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है. उनके द्वारा समझाई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होनलगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद में मैंनतय किया कि उड़ान की दिशा में है अपना करियर बनाउं. मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.’
6. 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे. इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया. 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया. उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें  भारतीय तकनीक से बनाईं.
7. 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार
न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम ने विजन 2020 दिया. इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई. कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.
8. 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया. उसी दौरान अन्ना
यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया. कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस
अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया. स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई.इसके पहले चरण में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर था. दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार
करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था. पृथ्वी, त्रिशूल,  आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए. कलाम ने अपने सपने रेक्स को अग्नि नाम दिया. सबसे पहले सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया. इसके बाद 1998 में
रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र  कहीं भी दागी जा सकती है. इस सफलता के साथ ही कलाम को मिसाइल मैन के रूप मे प्रसिद्धि मिली और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
9. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पर पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम
देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया.



मुझे लगा। …!
१- मेरे कमरे में बिस्मिल्लाह खान की शहनाई का संगीत बज रहा था । यह संगीत मुझे एक दूसरे काल, एक दूसरी जगह ले गया । २- मुझे लग रहा था कि मैं रामेश्वरम गया और अपनी माँ से लिपट गया । मेरे पिताजी अपनी अँगुलियों से मेरे बालों को सहला रहे हैं । 
३- मेरे मार्गदर्शक जलालुददीन ने मस्जिदवाला गली में जमा भीड़ को यह खबर सुनाई है ।
४- मेरी बहन जोहरा ने मेरे लिए ! विशेष मिठाई बनाई है । 
५- पक्षी लक्ष्मण शास्त्री ने मेरे माथे पर तिलक लगाया है ।
६- फादर सोलोमन ने मुझी पवित्र क्रॉस छूकर आशीर्वाद दिया है ।
७- मैंने देखा कि प्रो.साराभाई उपलब्धियों को देखकर मुस्करा रहे हैं । एक छोटा वृक्ष, जो उन्होंने बीस साल पहले लगाया था, अब एक बड़ा वृक्ष वन गया है, जिसके फलों का आनंद देशवासी ले रहे हैं ।
" यह उद्गार थे श्री अब्दुल कलाम साहब के, जब संन् 1981 के गणतंत्र दिवस के अवसर की पूर्व संध्या 25 जनवरी को प्रो. यू. आर. राव के सचिव महादेवन ने उन्हें दिल्ली से फोन करके बताया कि गृह मंत्रालय ने, पदम् भूषण सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है । वह अपनी आत्मकथा " अग्नि की उड़ान " में कहते हैं - जब मैंने डॉ. ब्रह्मप्रकाश को फोन किया और इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया । डॉ. ब्रह्मप्रकाश ने इस औपचारिकता के लिए मुझे डाँटते हुए कहा,' मुझे लग रहा है जैसे मेरे बेटे को यह सम्मान मिला है ' उनका यह स्नेह मुझे इतना गहरे तक छू गया कि मैं अपनी भावनाओं को और ज्यादा नियंत्रण में नहीं रख सका ।उद्धत संदर्भ - श्री अब्दुल कलाम साहब की आत्म कथा " अग्नि की उड़ान " से लिए गए ।

No comments:

Post a comment