Wednesday, 24 September 2014

" सरहद वालो संभलकर रहना "

"शूल पर कदम तो फूल बनते है ,कलम तलवार बनती है ,

सुबकिया अंगार बनती है,जुबाँ चलती जैसे कटार चलती है..


हम रागिनी देश की गाते है ,सरहद वालो संभलकर रहना 


यहाँ लहू हिन्दुस्तानी है ..गफलत में तो दुनिया चलती है
"
-- विजयलक्ष्मी 

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