Thursday, 14 January 2016

" मकर संक्राति "



मकरसंक्राति ----- दिनांक 15 / 01/ 2016 |
यद्यपि भारतीय कलैंडर चंद्रमा की गति का द्योतक माना जाता है...किन्तु मकर संक्रांत सूर्य की गति पर आधारित है |
मकर एक राशि है और सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं. इस त्योहार के साथ ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और जिससे इसे यह नाम दिया गया है.
मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिए इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं,
आइये जाने मकर सक्रांति मनाई क्यों जाती है :
1. मकर सक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए आते है, मकर राशि का स्वामी शनि है और इस द‌िन सूर्य देव शन‌ि महाराज का भंडार भरते हैं।
2. ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नही, लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं। इसलिए यह दिन पिता-पुत्र को संबंधो में निकटता की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
3. आज के दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ से युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने मधु के कंधे पर मंदार पर्वत रखकर उसे दबा द‌िया था। तभी से भगवान व‌िष्‍णु मधुसूदन कहलाने लगे।
4. गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने साठ हजार पूर्वजों की आत्मा की शांत‌ि के ल‌िए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिेए मकर सक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
5. मां दुर्गा ने दानव महिषासुर का वध करने के लिए इसी दिन धरती पर कदम रखा था।
मकर संक्रांति पर रसोई में तिल और गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है. इसके पीछे बीती कड़वी बातों को भुलाकर मिठास भरी नई शुरुआत करने की मान्यता है.|
वैज्ञानिक आधार की बात करें तो मौसम परिवर्तन पर तिल के सेवन से शरीर गर्म रहता है और इसके तेल से शरीर को भरपूर नमी भी मिलती है.|
तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात में उत्तरायन, पंजाब में माघी, असम में बीहू, और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी कहते हैं. देश में ही नहीं विदेशों में नेपाल, थाइलैंड, मयांमार, कंबोडिया, श्री लंका आदि जगहों पर भी इसे ऐसी श्रद्धा के साथ मनाते हैं.
ये त्यौहार वसंत का सूचक माना जाता है |


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