Friday, 14 July 2017

" जुगनू बन जलने की चाहत,"

कभी मेरी नजर से भी देख ए चाँद मेरे चाँद को ,,
सोचती हूँ मगर न लग जाए नजर मेरे चाँद को ||
--- विजयलक्ष्मी




खामोशी में सुनो आहत दिल की आहट ,,
बयाँबाजी शब्दों की छोटी लगने लगेगी ||
--- विजयलक्ष्मी


हम चाँद या सूरज हैं नहीं ,,सितारे जैसी औकात नहीं ,,
जुगनू बन जलने की चाहत, जा बैठे जहां प्रकाश नहीं || --- विजयलक्ष्मी

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