Saturday, 1 July 2017

" इसीलिए बरगद नीम बबूल पीपल नहीं ...."

नया भारत बनाना है ,
आगे बढाना है ,,
मान गये साहेब ...दुनिया को दिखाना है ,,
लेकिन ..
ये तो बताओ ..कहाँ तक ले जाना है ,,
बढ़ता तापमान पचास के पार पंहुचाना है
इसीलिए बरगद नीम बबूल पीपल नहीं ..
यारों बस यूकेलिप्टिस लगाना है ..
धरती बंजर होने दो
हर शजर को खोने दो ,,
हवा को खुश्क होने दो
पंछियों को रोने दो
लेकिन बस ..
वृक्ष तो यूकेलिप्टिस ही लगाने दो ..
यार क्यूँ सताते हो ..
क्यूँ फलदार वृक्ष से धरती का बोझ बढाते हो
खुद समझते नहीं कुछ भी
पेड़ो पर पत्थर पड़वाते हो ..
घने वृक्ष हुए गर .. घनी छाया मिल जायेगी
पथिक को थोड़ी ज्यादा राहत मिल जाएगी
आक्सीजन जनता के हिस्से ज्यादा आ जाएगी
समझा करो न तुम भी ..
और कितना समझाऊं
बोलो कितना बैठकर या सोचकर मुस्कुराऊं
यूँ खता का अंत नहीं है ,,
अहसास बिना तो आता बसंत नहीं है
सच बताऊं ..तो सुनो
इन वृक्षों से साम्प्रदायिकता की महक आती है
क्यूंकि वेद पुराण की गाथा इनमे भगवान बताती है
सेकुलरिज्म कमजोर हो जायेगा
यदि कोई कहीं भी नीम ,पीपल ,बबूल ,बरगद या आम लगाएगा ||
----- विजयलक्ष्मी

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