Thursday, 27 August 2015

" आँख में आंसूं हुए तो क्या ..हौसले बुलंद हैं,"


" शब्दों को रहने दो ,

शब्दों में कुछ नहीं,
छल कर सकते हैं
गर जीना है जिन्दगी की तरह ,
अहसास को जियो "

---  विजयलक्ष्मी




" जिसकी नजर में है उसीसे नजर छिपाए भी तो भला कैसे,

झूठ है सच गुनाह या पाकीजगी बताये भी तो भला कैसे ,"

---- विजयलक्ष्मी

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" आँख में आंसूं हुए तो क्या ..हौसले बुलंद हैं,
मौत का खौफ क्यूँकर,जिन्दगी रजामंद है
"
------ विजयलक्ष्मी

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" भावनाए है इसीलिए जिन्दा है हंसते हैं रोते हैं ...
भाव रहित तो शायद ...बस पत्थर ही होते हैं "
 ---- विजयलक्ष्मी



" चाँद की पतवार लिए सपनों की नाव समन्दर में जा गिरी ,
आँधियां भी साजिशन लहरों की अठखेलियों से जा मिली
."
---- विजयलक्ष्मी



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