Saturday, 15 August 2015

" कविता साँस बन जाये अगर ...,"

" कविता एक अनुभूति है एक अहसास है , कविता दिल की प्यास है .. एक पूजा है मेरा खुदा है , कविता खुद में सबसे जुदा है , कविता साँस बन जाये अगर ..., हर पल कविता लिखी जाए अगर .. कैसे रंग बदलती कैसे मगर .. सृजन जीवन का हिस्सा है , हर विनाश से अगला किस्सा है , उसे वक्त के लिए छोड़ दे , कलम के दीवाने लिखना कैसे छोड़ दे , ये बपौती नहीं किसी की , हों सकता है कि जिंदगी हों किसी की " --- विजयलक्ष्मी


No comments:

Post a comment