Tuesday, 7 June 2016

" तुम बहुत खुश हो न ये रंग दिखाकर .."

" भोर की महकती अलसुबह... और तुम
बहती सरल सुलभ पवन .....और तुम
गीली मिटटी सी यादें ...और तुम
कांच से मन में बसी तस्वीर .....और तुम
सृजन का सुघड़ होता इंतजार ----- और तुम
समय-हथौड़े का वार ....... और तुम
वो चंदा अमावस का लिए अधियारी रात ....और तुम
चांदनी बिन कुमुदनी उदास .....और तुम
ए जिन्दगी सुन,......
तेरी तमन्ना किसे है ..
बन्दगी किस्मत से मिलती किसे है
प्रथम बरखा का सौंधापन चखा जिसने है
सहरा पर प्रबंध और बाढ़ पर निबन्ध
सडक के दोनों मुहाने
चलते चलते रुकेंगे कहाँ कौन जाने
रुकने वाले ठहरे हैं....
राह के हमराह,, पैर के छाले ,,
हाथ के निवाले ..भूख का दरिया ..
जज्ब जज्बात ..बिलखती आवाज
सयाना कौन है ..
जो शहीद हो गया ..या देश बेच गया
इतिहास की गवाही ..
बिके हुए वकील ..
ताबूत की अंतिम कील
दीवाली के दिए और होली के रंग
देखा है न जिन्दगी को सुखदुख के संग
यही दो भाई है ...
लेकिन रहम की बहन नहीं संग
इसीलिए तलवार पर लहू से लिखते है अहिंसा
सोचकर देखा मरे हुए जिन्दा क्यूँ हैं...
और लिथड रही हैं जिन्दा लाशे चहुँ और
बछड़े के लिए रम्भाती गाय से मिले हो कभी ..जो दादरी में सो गया
पूर्णिया की झूठी गवाही पर जहां तगड़ा सा बबाल हो गया
JNU में उलट घूमते जुनू का बुरा हाल देखा
कुछ श्रम की बात दिल्ली वाले खा गये
कुछ बची खुची केरल में लतिया गये
नासमझ लोग बंगाल में पर्चे बाँट रहे हैं
शांति के पुजारी बंदूक बाँट रहे हैं
उत्तराखंडी सुना है दलित दलित बांच रहे हैं
डूब मरने की किसे पड़ी है ..
स्वार्थ की बेदी पर लक्ष्मीबाई खड़ी है
और प्रताप पर बिठाया अकबर महान है!!
भूले मान राजस्थान का गद्दारी की दिखती शान है
इसीलिए देश बांटने वालों के साथ जा रहेहैं लोग,,,
कुछ नहीं दिखरहा तो औरत को ही खा रहे हैं लोग
बेटे की बीवी को अपनी ब्याहता बना रहे हैं लोग
तुम बहुत खुश हो न ये रंग दिखाकर ..
तस्वीर ए जिन्दगी कैनवास पर सजाकर
कुछ तो समझा करो ..
सितारों भरी रात में शबनमी बरसात मन को बहुत भायी मेरे
||" ------- विजयलक्ष्मी

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