Wednesday, 15 June 2016

" वाह रे कलयुग के न्याय ......तेरी भी जय || "

" नसीबों की बात है सब ...वाकई नसीबों की बात है..इसीलिए तो 75बरस बाद दसर कुम्भ हुआ ... झेलम चिनाव गंगा के तट पर .... लाखों होते थे जहां वहाँ हजारों भी न दिखे .... ये कैसी गंगा-जमुनी तहजीब है ..... अमां इतने साल में तो आदमी पैदा होकर खिसक लेता है दुनिया से .... अच्छे-अच्छों को देखा है कूच करते हुए ...कूच करने से याद आया ...कैराना ...कांधला.. आसाम.. बंगाल..पूर्णिया ..मथुरा और अयोध्या ... हाँ भूल गये क्या इतिहास गवाह है..... विदेशी आतंकी आये देश को रौंदा नोचा-खौंचा फिर कब्जा जमाया जजिया लगाया ...पर्दा लागु किया ... जनेऊ उतारे गर्दन उड़ाई ...पूजा-स्थल कब्जाए .... और फिर गंगा-जमुनी तहजीब के गीत गाये ........वाह री तहजीब ...गोधरा याद है किन्तु क्यूँ हुआ गोधरा याद नहीं झूठ की बिना पर सालो से जिन्दा है ... और जिन्दा रहेगा ...भूल गये तो महाराणा को भूल गये दुर्गावती याद नहीं ... विक्रमादित्य तो जैसे गायब हो गया ... अपने घर के द्वार पर हनुमान जी की मूर्ति लगाने पर मुकद्दमा ठोकना पड़ता है ... वरना पुलिस वाले भी कुछ नहीं कर सकते ...... अरे ये कौन सी गंगा-जमुनी तहजीब है... भाई आओ रमजान मनाये इफ्तारी जरूरी हैतो दीवाली के दीपक कैसे पर्यावरण के साथ बदसलूकी करने लगे ... शेर को बचाने में लगे हो कुत्ते बिल्ली चूहे सब प्यारे हैं...... भाई लोगो बकरे और गाय को क्यूँ नहीं बख्शते ... कुर्बानी अपनी दी जाती है ...अपनी कमियों की दी जाती है ..और अपनाया जाताहै समभाव ...... किन्तु टीवी तो कुछ और बोल रहा है ...आज ही देखा ..".मुहं काला "का नया मुहावरा .......... "" झूठ का बोलबोला सच का मुहं काला ""वाह रे कलयुग के न्याय ......तेरी भी जय ||" -------- विजयलक्ष्मी

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