Wednesday, 20 April 2016

" यार चप्पल ही है कोहिनूर हीरा तो मत बना "



चप्पल चोरी क्या हुई आसमान सर पर उठा रखा था....मन्दिर का घंटा बज रहा था और दरवाजे केबाहर शुद्धिकरण मन्त्र चप्पल चोर की दावत में ...... कोई साथ दे रहा था कोई इधर उधर झाँक रहा था ... कोई देखा मुस्कुराया और चल दिया ... जितनी गिनती उतनी रंगत...... एक बोला ..बेटा घर पहुंच पिताजी को कहियो ....चोरी हो गयी ..., मरवाएगा क्या ? ...अरे चप्पल ही तो थी मंत्री की गद्दी कोई थी जो चोरी हो गयी ...... अरे छोड़ लोग तो कजरी पर फेंकते फिर रहे हैं तू चप्पल के लिए परेशान है ... यार चप्पल ही है कोहिनूर हीरा तो मत बना ...जो सरकार चली जाएगी....... भाई यूँ न बोल गरीब की चप्पल रोटी सब कोहिनूर ही होता है....और जनता जवाब मांगेंगी ...... छोड़ न ... नंगे पैर कैसे चलेगा भाई...... ले उसमे क्या है हरीश रावत को देख घोटाला सरकार के लिए पदयात्रा कर रहा हैं....... इसे तो घर तक जाना है ....... अमां यार वो नंगे पैर नहीं चलता ... रहने दे नंगा तो वो उसी दिन हो गया था जिस दिन उसका स्टिंग वीडियो टीवी पर आ गया था....... वो नेता की खरीद फरोख्त करने में लगा है........ बोलता है कोश्यारी ने बहका लिया है आ जाये वापिस और ले जाये जितना ले जासके ...मैं आँख बंद कर लूँगा ..... इसके पिताजी एक जोड़ी चप्पल के लिए आँख नहीं बंद कर सकते क्या .... वहां करोड़ो के वारे न्यारे हो रहे है ...और तुम लोग सौ रूपये की चप्पल के लिए परेशान हो .......||
क्या करें यार हम नेता तो हैं नहीं सुबह से शाम रेहड़ी लगाते हैं जब दो वक्त की रोटी खाने को मिलती है...... नया कपड़ा नई चप्पल जूते हमारे यहाँ तीज त्यौहार की तरह होते हैं ...इन नेताओ की तरह नहीं हमारी कमाई को मुफ्त का माल समझकर खा जाते है ....और डकार भी नहीं लेते....... इन्हें क्या पता आम आदमी का दर्द/////// कोई फ्री के चश्मे लगाकर वोट खरीदता है कोई सब्जबाग दिखाकर ..बेटे हमे कमाकर ही खाना है ..... समाज में रहना है ...ये जो मंत्री है झूठ का पुलिंदा ही होते हैं .....दो चार को छोड़ दो इन्हें आम आदमी के दर्द से नहीं आपनी गद्दी और अपने स्वार्थ से मतलब होता है इसीलिए हरीश रावत भी टीवी पर रोज रोज रोता है सरकार बनाने के लिए मारा मारा घूम रहा है ....... देख कोई अपनी चप्पल भी तो छोड़ गया होगा...... यार वैसे चप्पल फेंकने वाले को अपने कजरी टिकिट देता है इलेक्शन में ........ यार इस चप्पल का मालूम हो गया तो वो इसे भी टिकिट देदे अगले इलेक्शन में ...... गम के माहौल में भी हंसी का ठठ्ठा गूंज उठा ....एक पुराणी सी चप्पल मिली वही पहन घर की राह ........ हिसाब दिमाग में था कम से कम एक सप्ताह यूँही रहने के बाद चप्पल खरीदी जाएँगी ....... वाह रे चोर किसी नेता की चुरा लेता ......जैसे नेहरू ने सुभाष की फाइल चुराई थी ...... कभी तो सार्वजनिक हो ही जाती || आम आदमी पुराण ........ कथा समाप्त नहीं लेती न विराम लेती हैं ...... द्रोपदी के चीर सी समस्याए बढती रहती हैं ..और आम आदमी सांस लेते लेते ही विराम दे देता है एक दिन ||
---------- विजयलक्ष्मी

No comments:

Post a comment