Saturday, 9 April 2016

" भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2073 "


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भारतीय नव वर्ष, युगाब्द कलियुग वर्ष 5118, विक्रम संवत् 2073
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हे कृपाण धरिणी !शत्रु विनाशिनी !
हिंसा विदारिणी ,हे सुरेश्वरी देवी !
रक्ष कवच दायिनी ,रौद्र रूपा धारिणी !
माँ कालिके मयूराक्षी !हे भय विनाशिनी !
हे शत्रु हन्ता माँ !हे दुर्मति हारिणी !
हे भवानी ! मोक्ष दायिनी माँ ,हे दर्प हरिणी !...
हे महिषासुर मर्दिनी !हे काल नाशिनी !
हे मुंड माल धारिणी! हे जगतजननी माँ कपालिनी !
हे भवानी प्रसन्न भव ,रोग विनाशिनी !
हे कालिके ! जगदम्बिका माँ कष्ट निवारिणी !
हे मर्दिनी ! हे जगदीश्वरी !हे सौंदर्य स्वरूपा माँ ,हे जीवन दायिनी !
.- विजयलक्ष्मी
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8 अप्रैल 2016 को हमारा भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2073 (युगाब्द 5118) का प्रारंभ हो रहा है । इस संवत्सर का नाम “सौम्य” है एवं इसके राजा शुक्र और मंत्री बुद्ध हैं ।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा एक स्वयं सिद्ध अमृत तिथि है एवं इस दिन यदि शुद्ध चित्र से किसी भी कार्य की शुरुआत की जाए एवं संकल्प किया जाए तो वह अवश्य सिद्ध होता है ।
चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :
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‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’
– ब्रह्म पुराण में वर्णित इस श्लोक के मुताबिक चैत्र मास के प्रथम दिन प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी | इसी दिन से संवतसर की शुरूआत होती है|
नव वर्ष का आवाहन मन्त्र :
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ॐ भूर्भुवः स्वः संवत्सर अधिपति आवाहयामि पूजयामि च
आवाहन पश्चात
यश्चेव शुक्ल प्रतिपदा धीमान श्रुणोति वर्षीय फल पवित्रम भवेद धनाढ्यो बहुसश्य भोगो जाह्यश पीडां तनुजाम , च वार्षिकीम
अर्थात जो व्यक्ति चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को इस पवित्र वर्ष फल को श्रृद्धा से सुनता है तो धन धान्य से युक्त होता है ।चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्राह्मण या ज्योतिषी को बुलाकर नव संवत्सर का फल सुनने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है ।
1. चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 115 साल पहले इसी दिन को ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन किया था।
2. सम्राट विक्रमादित्य ने 2073 साल पहले इसी दिन राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की।
3. भगवान राम का राज्याभिषेक इसी दिन किया गया।
4. शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
5. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस | विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु इसी दिन का चयन किया।
6. समाज को अच्छे मार्ग पर ले जाने के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की।
7. सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म दिवस।
8. सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज रक्षक वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए।
9. युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन, 5118 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ।
डीडी
10. इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार का जन्मदिवस भी है।
विक्रम संवत
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'विक्रम संवत' अत्यंत प्राचीन संवत है। भारत के सांस्कृतिक इतिहास की दृष्टि से सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रीय संवत 'विक्रम संवत' ही है।
आरम्भकर्ता : सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
शुरुआत : लगभग 2,068 वर्ष यानी 57 ईसा पूर्व में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से।
पौराणिक महत्त्व:-
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पुराणों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण किया था, इसलिए इस पावन तिथि को 'नव संवत्सर' पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।
शास्त्रीय मान्यतानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि के दिन प्रात: काल स्नान आदि से शुद्ध होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर ओम भूर्भुव: स्व: संवत्सर- अधिपति आवाहयामि पूजयामि च इस मंत्र से नव संवत्सर की पूजा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने देश के सम्पूर्ण ऋण को, चाहे वह जिस व्यक्ति का भी रहा हो, स्वयं चुकाकर 'विक्रम संवत' की शुरुआत की थी।
ये भी मान्यता है कि सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने देशवासियों को शकों के अत्याचारी शासन से मुक्त किया था। उसी विजय की स्मृति में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से 'विक्रम संवत' का आरम्भ हुआ था।
भारतीय नव वर्ष, युगाब्द कलियुग वर्ष 5118, विक्रम संवत् 2073 की हार्दिक शुभकामनायें........||



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