Sunday, 14 April 2013

ख्वाब न खो जाये ..

अहसास ए रूह कयामत का आगाज देती है ,
कदम रुक जाते है चलते हुए जब आवाज देती है .
.विजयलक्ष्मी


अहसास ए रूह रंग ए फिजा बदल जाती है 
नयन से छलके आंसू में तस्वीर बन जाती है .
.विजयलक्ष्मी


ये वक्त भी चल बसेगा रह गुजर से उनकी ,
उस रह गुजर का क्या हो जो गुजर न सकी .
..विजयलक्ष्मी



वो मंजर जो बसे है नयनपट में ,
नयन कोर पर सिमट रहे है ढलक कर
..विजयलक्ष्मी


चलो पंछियों को कहे कोई और राग छेड़े ,
ये गीत अब वक्त को गुनगनाने दो मुहब्बत का
..विजयलक्ष्मी



सहरा न हो जाये जमी दरक न जाए फसाने ,
आओ समेट ले ख्वाब न खो जाये छलक कर
..विजयलक्ष्मी

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