Thursday, 24 December 2015

" कैसे कहूँ मेरी क्रिसमस,,"

" बड़ा दिन " ( भारत का सबसे छोटा दिन )
स्वीकारो  इस सच को 
क्या तुमने उतारा कभी सूली से आजतक भी
बताओ ..सोचो तो
कैसे कहूँ मेरी क्रिसमस,,
जब कुंवारी औरत के माँ बनने पर सूली बनती हो हरबार इक नई
सत्य तो सूली पर ही चढ़ा है सदा से
झूठ ने कंधा दिया हर बार है
ईसा चढ़े जब से उतारा नहीं आजतक किसी ने भी
पहले मौत का जश्न होगा फिर जिन्दा होने का स्वांग
जिन्दे को मारते रहे ..मारकर पूजते हैं बताकर भगवान
वाह रे तेरी माया निराली है इंसान .---------------- विजयलक्ष्मी



" उभरे है मुस्कुराहट दर्द के मुहानों में "




" अक्सर प्रतिद्वंदी नजर आते हैं..
इक दूजे के खिलाफ कटघरे में खड़े पाते हैं
दूरियां कितनी भी हो ..या खिंचे दीवारे नफरत की
मगर सच है यही ...
स्त्री और पुरुष इक दूजे बिन अधूरे रह जाते हैं ,,
सरिता के दो पाटों से साथ चलते जाते हैं ,
स्नेह- धारा से दोनों ही भीगते हैं जब ..
दूरियों नजदीकियों को त्याग पूरे हो पाते हैं ,,
भर जाते घाव सभी महज इक प्रेम से 
टूटे फूटे तल्ख रास्ते भी मन को भा जाते हैं 
जख्म दुनियावी पुष्प बन महक जाते हैं ,,,
मीरा या राधा.... कृष्ण याद बहुत आते हैं "

 ----- विजयलक्ष्मी

" कहो तुम, बिखरे हो क्यूँ फिजाओं में ,
आकरके संवर जाओ मेरी वफाओ में ||


खुशबू ,महकाती है जो इन साँसों को,
अब सिमट भी जाओ उन्ही हवाओं में ||



                                                     इक तेरा साथ ही यूँ मुनासिब न हुआ
बरसती देखी बूंदे क्या कभी घटाओं में ||

                                                      मैं संवर तो जाऊं हर साँझ औ सहर,
चमकना बनके सूरज मेरी निगाहों में ||

                                                         बकाया सी आरजू इक आईना हो ,
मिलन रूहानी दिखे इन निगाहों में ||

                                                      पशेमां हाल जमाने को बताना क्या ,
उभरे है मुस्कुराहट दर्द के मुहानों में || "
--- विजयलक्ष्मी

Wednesday, 23 December 2015

" किसान भूखा नहीं होगा ...उसका निवाला सूखा नहीं होगा ,,"

" पलकों में ख्वाब से ठहरे तुम ..
आंसूं बन न गिर जाना .. 
गिरती रही बबूल पर भी ओस..
बबूल ने भी कब माना ..
चांदनी बिखेरती ठंडी रौशनी..
चकवा गाये विरही गाना ..
जलता रहा सूरज तन्हा-तन्हा
सौंधापन लिए बरसात आना
गगन के सितारे से गुफ्तगू ..
चोरी से छत पर आना ..
रात अमावस देख अंधियारी ..
ओस का गिर जाना ..
रात का काजल आँख में लिए ..
अनजान पथ पर बढ़ जाना ..
दर्द की इक पोटली ..
सरे राह मन गाडी पर लद जाना ..
इंतजार भोर का ..
मुझे भी उसे भी..मगर मंजिल का खो जाना .
कदम कदम फिर दिशा बोध होगा ..
पल्लवित उपवन जाने कब पुष्पित होगा,,
आस भी है विश्वास भी है...अहसास भी है ..
और..इंतजार उस आखिरी लम्हे का
जब सूरज निकलेगा ..
मुस्कान खिलेगी होठो पर
दुःख पोटली बना खो जायेंगे ,,
गम बक्से में बंद हो जायेंगे ...
और..
आँख का समन्दर खाद बनेगा खेतो की
किसान भूखा नहीं होगा ...उसका निवाला सूखा नहीं होगा ,,
न साहूकार उधारी मांगेगा ..
न बेचनी पड़ेगी गाय किसी कसाई के हाथों चंद रुपयों की खातिर
न कोई बाला भय से थरथर कांपेगी ,,
न आजादी होगी किसी अपराधी को ,,
न दर्द उगेगा किसी भी आँख में
और स्वार्थ डूब मरेगा ...ईमान के समन्दर में
जमीर की ऊँची लहरों के बीच "
---- विजयलक्ष्मी

Sunday, 20 December 2015

" कांग्रेस का तोहफा महिलाओ के नाम "

कांग्रेस ने सडसठ साल में दिया रेपिस्ट को छुड़ाने वाला कानून .......और बात करती है महिला सुरक्षा की .... जिस पार्टी के अध्यक्ष पद पर लम्बे समय तक एक औरत विराजमान रहकर भी अपराध के खिलाफ सख्त कानून नहीं बना सकी ...उसका वजूद खत्म होना ही राष्ट्र को सुरक्षा की तरफ लेजा सकता है.... यदि यही कांग्रेस स्वतंत्रता का दम्भ भरती है तो झूठ लगता है सब || ----- एक नागरिक ( विजयलक्ष्मी )

" करो बुरे कर्म .. दिल्ली की सरकार उसके लिए इनाम देगी,,"

" दामिनी ...नहीं ..नहीं ज्योति कहिये साहिब ,
तीन बरस हो गये न्याय नहीं मिला है..
जाने कितनी ज्योति दामिनी बन गयी गये तीन बरसों में
न्याय दीखता था अर्श पर बेहोश पड़ा है फर्श पर 
उम्र ने कर्म नहीं देखा ..फिर सजा उम्र को क्यूँ देखे ,,
सत्य कहूँ तो न्याय भी मोहताज हुआ है आज
कभी विपक्ष के कारण संसद के ठप्प होने का ..
कभी वकीलों के भीतर छिपे स्वार्थ के कोने का ..
मोमबत्ती और जुलुस से ईमान नहीं जिन्दा होता ..
गुनहगार के वकील से पूछो जाकर वो क्यूँ नहीं शर्मिंदा होता
गलती को ढकने वाला गुनहगार बड़ा अपराधी से..
उसका बहिष्कार करो अपनेपन की आबादी से..
मरे डूब चुल्लू भर पानी में ..
जिसकी जीवनचर्या जाती है इक गुनहगार बचाने में ,,
ज्यादा दौलत की भूख जिन्हें .. अपराधी देते मुहमांगी कीमत उन्हें ..
साम दाम दंड भेद से गुनहगार बच जाते हैं ..
क़ानून बनाने वाले भी क्या दौलत पर भरमाते हैं ..||
कानून शिकंजा क्यूँ नहीं कसता झूठ को सच बनाने वालों पर
सबक उन्हें भी सिखाना होगा ,,
सच का पाठ पढ़ाना होता ...
सोया जमीर जगाना होगा
गुनाह व्याभिचारी बचाना होगा
झूठे दौलत के भूखों को सामाजिकता का पाठ पढ़ाना होगा  "
---- विजयलक्ष्मी

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" अट्ठारह वर्ष से कम ..
करो बुरे कर्म .. दिल्ली की सरकार उसके लिए इनाम देगी,,
बदले में तुम्हारी बिरादरी की वोट लेगी..
और दिल्ली बढ़ते दुराचार की आरामगाह बनेगी ,,
देश की गलियों में गुनहगार कुकुरमुत्ते से उगेंगे ,,

सारे ही दिल्ली की "आप सरकार " के खेवनहार बनेगे..
दोनों एक दूजे के सहारे ही तरंगे
शर्मनाक परिस्थिति मौत के हकदार को देरही है पुरुस्कार || "
----------- विजयलक्ष्मी


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कांग्रेस ने सडसठ साल में दिया रेपिस्ट को छुड़ाने वाला कानून .......और बात करती है महिला सुरक्षा की .... जिस पार्टी के अध्यक्ष पद पर लम्बे समय तक एक औरत विराजमान रहकर भी अपराध के खिलाफ सख्त कानून नहीं बना सकी ...उसका वजूद खत्म होना ही राष्ट्र को सुरक्षा की तरफ लेजा सकता है.... यदि यही कांग्रेस स्वतंत्रता का दम्भ भरती है तो झूठ लगता है सब || ----- एक नागरिक ( विजयलक्ष्मी )