Thursday, 19 November 2015

" मेरा भारत सहिष्णु है आज भी.. क्यूंकि कुछ भी बोलने को तुम हो आजाद "




" ख़ामोशी चीखती है,
आंसूओ में ढलकर,,
कभी काश्मीर जाकर तो देखो
रोते हुए दुधमुहें बच्चे को दूध पिलाकर देखो
तुम्हे चिंता अपनी औलाद की ठहरी हुजुर,,
कभी वतन के जख्मों को सहलाकर देखो
हम असहिष्णु तो तब भी नहीं थे जब बाबर ने हमको धोखा दिया
जजिया लगाकर मुगलों ने हमारे ईमान को धोखा दिया था
छुरा घोपा था मीना बाजार लगाकर ,,
अपने स्वार्थ की खातिर जोधाबाई को ब्याहा था
असहिष्णु नहीं हुए हम गुलाम वंश ने भी भारत में गुलामी को रोपा था
दर्द से चीखे थे,,कोई साहित्यकार नहीं आया कलम का सर उठाकर
किसी फिल्म वाले ने भी तो दुश्मन को नहीं टोका था
जब चालीस मन जनेऊ उतरते थे हमारे सिरों के साथ ,,
जब चिनवा दिए थे औरंगजेब ने सिक्ख छोटे से दो बालक एक साथ ,,
जब गुरु का शीश टंगा था चौराहे पर दुश्मन के हाथ ,
असहिष्णु तो हम तब भी नहीं हुए थे जनाब ,,
तुम सोचो और बतलाओ ...
हम तो तब भी सहिष्णु थे जब हेमराज से जांबाजों के सर कलम किये दुश्मन ने
जब आतंकी आकाओ की खातिर न्यायालय चलवाए आधी रात
नहीं फब्ती दिखावे की फिल्मों में देशप्रेम की बात
रील की निकलकर असली हीरो बनो तो कोई बात बने ..
यूँ शब्दों को मत तोड़ो ठाली दौलत पर बैठ गाढ़ी कमाई हमारी नहीं भुने चने
काश्मीर पर दुश्मन देश के झंडों पर तो फतवा पढ़वाओ .
कितने पंडित थे जिनके बेटो को कलम किया था ,,
उठाकर औरतों को उनका दैहिक भौतिक शोषण किया था ,,
छोडो बाकी बातें तुमने प्रभु शकर का उड़ाया था मजाक ,,
इक बार जरा फिल्म बनाकर देदो पैगम्बर पर आज
सहिष्णुता की परिभाषा समझ आ जाएगी ,,
किसे कहते हैं आजादी बोलने की दिख जाएगी ,,
एक देश में दो कानून खत्म करने की बात करो ,,
जरा सडक पर उतर वन्देमातरम की लगाओ पुकार,,
मेरा भारत सहिष्णु है आज भी.. क्यूंकि कुछ बोलने को तुम हो आजाद " --- विजयलक्ष्मी




" मैं मणिशंकर अय्यर नहीं हूँ ,,
मेरा देश असहिष्णु भी नहीं है,,
न ही मैं सलमानखुर्शीद हूँ ,,
मुझे पाकिस्तान से कोई मतलब नहीं ,
हम अपने घर को आप सम्भाल लेंगे ...|
मुझे धर्म वाले नास्तिक कहने लगे,,
बस मुझे मेरे वतन का रहने दो ,,
मुझे खुद को टुकडो में न बांटो मुझे हिन्दुस्तानी रहने दे
मुझे सुहाती हैवन्देमातरम ,,मुझे देशराग गाने दो,,
लोकलुभावन वादे नहीं भाते मुझे हवा में घुल जाने दो,,
वतन को मुझमे मुझे वतन में समाने दो ,,
तुम नहीं समझोगे ... हाँ हिन्दू हूँ मैं,,
मुझे हिंदुस्तान बन जाने दो,,
सेकुलर के ठप्पे न लगाओ मुझपर,,,
सेकुलर नहिन्दू न मुसलमान है ,,
आधा पशु आधा इन्सान है,,
मुसलसल धर्म इंसा को इंसानियत सीखता है ,,
मानुष आतंकी हुआ स्वार्थ में और बदनामी धर्म पाता है  "
---- विजयलक्ष्मी

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