Monday, 19 January 2015

" ये उत्तराखंड शीर्ष भारत का देख दुनिया सारी अचम्भित है"

खूबसूरत दृश्य है वर्णन इसका कठिन है
चारो तरफ पर्वत श्रृंखला नदियो का जीवन अति जटिल है
सौन्दर्य युक्त घाटिया पुष्पित पल्लवित है
प्राकृतिक उपादानो से संचित है

श्वेत मुकुट धारे खड़ा हिमालय विस्तृत है
धरती का हरित बाना देख जगत सारा चकित है
सूर्य स्वर्ण रश्मि रथ सवार परिलक्षित है
छिपता संध्या के आंचल में करता जग विस्मृत है

गंगा की धरा अविरल यमुना संग धरती पर अवतरित है
जय गान नित्य आरती जय जय पवन भागीरथी निरत है
पावन धरती म्न्त्रोच्चारित संतो की भूमि है
तटनि के तट बैठ ज्ञान करते प्रसरित है

बहुमूल्य वन औषधि लिए पल्लवित है
अनमोल है धरा पर स्वास्थ्य शक्ति इनमे संचित है
वर्षा मौसम को करते अनुकूल मानव जाति हित है
ये उत्तराखंड शीर्ष भारत का देख दुनिया सारी अचम्भित है
----- विजयलक्ष्मी 

Sunday, 18 January 2015

जन्नत कौन जाएगा ...?

एक सत्य 
देह बची है 
नेह खो गया 
इंसानियत मर चुकी है 
अधर्म जिन्दा हो रहा है 
बंदूक की आड़ में
जिसमे
न शिकवा न शिकायत
न शब्द न कयास
फैसला ....
और
मिलती है मौत धर्म के नाम पर
वो ....क्या कलंक कह दूं उसे
मानवता पर
ये कौन सा रास्ता है
जहां
मौत सबसे ऊपर बिराजी है
और बकाया ...........
सन्नाटा ,
खतरे में कौन है
" मौत के सौदागर "
जिन्दगी की राह में उगने लगी बंदूकें
स्कूल में ज्ञान नहीं बंदूक उगलती है मौत
जलती खौलती उबलती
फिर एक वादा ...खुद से
मौत देने का
कोई कार्टून ,,
बेइज्जत कर देता है रहनुमा को
जैसे वो मोहताज है
तुम्हारे फतवे का
बताओगे मुझे ..
जन्नत कौन जाएगा ...?
हत्यारा या हत्या का किरदार
किसपर रहमत बरसेगी ...?
समझ से परे सवाल ...?
जवाब लापता है ..
कोई है ..जिसे पता है ,
इमदाद किसकी ..
लाचारो की ..या गुनहगारो की
सुना है ..
आतंकवाद का धर्म नहीं ..
वो किसी का हमदर्द नहीं...
फिर बोलूं ..
कोई तो जारी करो
कही से तो जारी करो
विश्वास तारी हो
जिन्दगी सबपर भारी हो ..
जाने कब आएगा ..
आतंक के खिलाफ ..कोई
" एक फतवा " ---- विजयलक्ष्मी

Tuesday, 13 January 2015

" मालूम है सभी को मय अच्छी नहीं होती "

शिकवा भी क्या करें बतादो रहगुजर से ,
गिला करके भी तो गुजरना उसी डगर से ||

उम्मीद ओ करम की रहनुमाई क्यूँकर
उठाया न कोई कांटा तक किसी डगर से ||

क्यूँ बहारो का मौसम गुजरे मेरी गली से
हमने तोड़े होंगे पत्ते कभी किसी शजर से ||

हाल ए दिल न जाना उस गरीब माँ का
बेटा गया था पढने ,लौटा न था शहर से ||

मालूम है सभी को मय अच्छी नहीं होती
पीते है जहर क्यूँकर नहीं बचते उस कहर से||
--- विजयलक्ष्मी 


ॐ  का उच्चारण है चमत्कारिक !!

- ॐ  के उच्चारण मात्र से मृत कोशिकाएँ जीवित हो जाती है |
- मन के नकारात्मक भाव सकारात्मक में परिवर्तित हो जाते है |
- तनाव से मुक्ति मिलती है |
- स्टेरॉयड का स्तर कम हो जाता है |
- चेहरे के भाव तथा हमारे आसपास के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है |
- मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं तथा हृदय स्वस्थ होता है |
- ॐ सूर्य से निकलने वाली तरंगो से प्राप्त आवाज अर्थात ब्रह्मांड में मान्य अर्थात सनातन सत्य |


बंदूकों के साये में जिन्दगी अनाथ थी

जिन्दा होती है रूह देह मरने के बाद ही ,
नेह-नदी में तैरती तरंगो ने आवाज दी

इम्तेहाँ अहसास के रहे दर्द में पगे हुए
देह से इतर उडी रागनी वही साथ थी

श्रृंगार अंगार का चिंगारियां भभक उठी
रौशनी दिखी मगर सरहद के पार थी

बह रही जो आग थी बस्तियां जल गयी
बंदूकों के साये में जिन्दगी अनाथ थी

चौखट पर बैठकर दीप जलाए राह में
रौशनी बिखरे राह में इतनी सी बात थी
--- विजयलक्ष्मी