Saturday, 30 July 2016

" शब्दों में वो बात कहाँ जो नूर ए नजर में हैं "

" शब्दों में वो बात कहाँ जो नूर ए नजर में हैं ,,
चेहरे में क्या रखा है ,बस चरित्र शिखर में हैं ||
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शख्सियत की पहचान दौलत से करने वालों,,
अपने देश की सुरक्षा देशभक्तों के जिगर से है ||
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उनका भरोसा क्या जो दलाली की खाते रोटी
पूछो उनसे,, जख्म जिनके लख्ते-जिगर पे हैं ||
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बिकते मिले कागजी टुकडो में जिनके जमीर ..
दलाली है ईमान,पीढियों से दौलत ए असर हैं ||
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कृषक की आत्महत्या जिनकी सभा के बीच
पूछिए तो उनसे पाक-साफ़ किसकी नजर में हैं ||
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पाखंड के पुजारी,झूठ के प्रणेता सत्य खो गया
राजनैतिक स्वार्थ में लटकी नैतिकता अधर में है|| "
 ---------- विजयलक्ष्मी

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