Sunday, 14 February 2016

" बस मन गया अपना तो वेलेंटाइन डे || "



हैप्पी वाला वेलेंटाइन है ||
दुआ भी करंगे ईश से दर्द ए दवा को भी कहेंगे ,
तन्हाईयो में भी मुस्कुरा उठे होठ ,यही चाहेंगे .- विजयलक्ष्मी
कृष्ण सा जीवन कृष्ण सा ज्ञान कृष्ण सा युद्ध कृष्ण सी कलाएं कृष्ण सा प्रेम ....क्या सम्भव है धरती पर जहां प्रेम अपनी पराकाष्ठ को छुए तो किन्तु अपवित्र न हो ...पूर्ण पवित्र प्रेम ,देह से विलग ,जहां शरीर विदेह जनक की तरह अलग थलग हो और प्रेम रहे शाश्वत सत्य बनकर ,जपे प्रतिक्षण ,डूबे उस प्रेम में ,जैसे.... जल में रहके भी कोई गीला न हो ...रात तो किन्तु अँधेरा न हो ...धुप सूखे भी नहीं ...जले मगर बर्फ सी ठंडक लिए ..आत्मा का शुद्ध सरल और शाश्वत रंग ...यदि हाँ ...तो समझो प्रेम पा लिया आपने ..और अगर मिलन की जरूरत है और पाने की लालसा बकाया है तो सब कुछ अधुरा ही है ...राधा सा प्रेम ...मीरा सा बावरापन.. सुर सी साधना तुलसी सी भक्ति ..सुदामा सी श्रद्धा बिखरा पड़ा है जैसे समेटने की देर है ... राधा सा शाश्वत अटल प्रेम ...राधा पूर्ण स्त्री ...जिसमे स्वयम में ही कृष्ण को समा लिया और उधौ के सम्मुख प्रगट कर प्रेम की पराकाष्ठा के दर्शन कराए ...प्रेम कृष्ण राधा सा ही शाश्वत और सत्य है बाकी वृथा ,देह के साथ शुरू और देह के साथ खत्म ..|देह के साथ रहकर आत्मा भी बीमार समझने लगती है खुद को ..देह रूठकर नेह से छूट जाती है और रह जाती है विलग आत्मा ..यही वो सत्य है जो जीवात्मा स्वरूप में प्रभु से मिलता है अत:प्रेम उज्ज्वल होना चाहिए ..जिसे आत्मा के साथ ले जाया जा सके ...सांसारिक मोह बंधन युक्त नहीं .." ईश्वर साक्षी रहे इस पवित्र प्रेम का "!




" बयाँ जो कर गयी आँखे हाल ए दिल तेरा 
बना गयी शाम ए गजल, वही मुकाम मेरा

रस आती नहीं जिंदगी जो तु शामिल नहीं 
सुकूं पायेगा कैसे तुम बिन, ये दिल मेरा

वो कौन पल जो मिले नज़रों से तुम आकर 
अमीत कहाँ ढूंढे बता दे, खोया है सकूं मेरा "



जब दिल और राग साथ हो .... बस मन गया अपना तो वेलेंटाइन डे ||
गिफ्ट करना है देह का नहीं नेह का दो
तन से नहीं मन से दो ....
सूरज सी रोशन मुस्कान खिल उठे ..
फूल महक उठे अहसास में ...
और बासंती पवन झूम उठे मन में ...
प्रकृति बन मन अम्बर पर छा जाओ तुम ...
और खिल उठे कायनात ...
एक दिन नहीं ..
हर लम्हा जिन्दगी का वेलेंटाइन होगा ...
सबको मुबारक होगा ...मुझे भी आपको भी ..
हम चले सोचते हैं मीरा बने या राधा
चाहिए तो कृष्ण ही -------- विजयलक्ष्मी

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