Monday, 2 April 2018

कलियों वाला चमन है तू.||


कलियों वाला चमन है तू.||
महकी महकी डगर है तू,

छाया हुआ हस्ती पर मेरी
लगता रहा अम्बर है तू ||

कौन किसके साथ चलता
कहदे किसका सफ़र है तू ||

ढूंढती रहती हैं नजरें
बतला मुझे किधर है तू ||

दुआ में है या पूजा में बैठा
या फ़क़ीरी का घर है तू ||

घूमी नजर खुदपर पर टिकी
ये कैसा जादूगर है तू ||

जो क्षितिज पर खेलती है
वो मिलती हुई नज़र है तू ||

लग रहा हुई भोर जैसे
या रौशनी का बसर है तू ||
------ विजयलक्ष्मी

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